Wednesday, March 4, 2026

गाजोल में शरणार्थी दंपत्ति को मिला सीएए के तहत भारतीय नागरिकता प्रमाणपत्र


गाजोल में शरणार्थी दंपत्ति को मिला सीएए के तहत भारतीय नागरिकता प्रमाणपत्र


1993 में बांग्लादेश से आए महेंद्र कुमार सिंह और आरती सिंह को तीन महीने बाद मिला नागरिकता प्रमाणपत्र।

आज खबर (हिंदी), [राजनीति] गाजोल, मालदा, ०४/०३/२०२६ : मालदा जिले के गाजोल क्षेत्र के शंकरपुर निवासी एक शरणार्थी दंपत्ति को Citizenship Amendment Act (सीएए) के तहत भारतीय नागरिकता प्रदान की गई है। हबीबपुर के बाद यह क्षेत्र का एक और मामला है, जहां सीएए के माध्यम से नागरिकता दी गई है।

महेंद्र कुमार सिंह और उनकी पत्नी आरती सिंह ने धार्मिक कारणों से बांग्लादेश छोड़कर 1993 में भारत में शरण ली थी। तीन दशक से अधिक समय तक भारत में रहने के बावजूद उन्हें अब तक भारतीय नागरिकता और मतदाता पहचान पत्र नहीं मिला था।

करीब तीन महीने पहले उन्होंने सीएए के तहत आवेदन किया था। डोल यात्रा के दिन स्थानीय भाजपा विधायक Chinmoy Deb Barman चिनमय देब बरमों ने उनके घर जाकर उन्हें सीएए प्रमाणपत्र सौंपा।

महेंद्र कुमार सिंह ने बताया कि उनका घर बांग्लादेश के टांगाइल-मीरजाफर इलाके में था। उन्होंने कहा, “हम 1993 में भारत आए थे। तीन महीने पहले सीएए के तहत आवेदन किया था। आज मुझे प्रमाणपत्र मिला है। मैं वर्षों से चिंता और भय में जी रहा था। अब मैं बहुत खुश हूं। प्रधानमंत्री Narendra Modi और गृह मंत्री Amit Shah जो कहते हैं, वह करके दिखाते हैं।”

वहीं विधायक चिन्मय देव बर्मन ने आरोप लगाया कि सत्तारूढ़ All India Trinamool Congress राजनीतिक लाभ के लिए शरणार्थियों को गुमराह कर रही है। उन्होंने कहा कि जो भी पात्र हिंदू शरणार्थी भारत में रह रहे हैं, उन्हें सीएए प्रमाणपत्र दिया जाएगा और किसी को घबराने की जरूरत नहीं है।

इस घटना के बाद पश्चिम बंगाल में सीएए के मुद्दे पर राजनीतिक चर्चा एक बार फिर तेज हो गई है। 

No comments:

Post a Comment